आब त किछ मास भ गेल अई सम्मलेन में गेला । ई दू दिनक सम्मलेन रहे जईमे पहिल दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आ दोसर दिन "मैथिलि भाषा के उद्भव आ विकास " पर चर्चा कैल गेल।
हमर जिज्ञासा दोसर दिन के प्रोग्राम में बेसी रहे । एक टा नेपालक भाषा वैज्ञानिक जिनकर किछ किताब पढने व् छलउँ आ हुनका दिया भी सुनने छलउँ । हुनकर चर्चा के विषय रहे "मैथिलि भाषाक मानकीकरण" । सब गोटा के सुन क इहे बुझैल की संविधान में मान्यता भेट के बादो अखन भाषाक विकास में बहुत किछ केनाई बाकी अइछ।
दू टा गप जे हमरा बीसेसकर सोच जोगर बुझैल - एक, की मानक मैथिलि के ढांचा तैयार केनाई जेना मधुबनी अथवा दरभंगा के मैथिलि के मानक माइन क आधुनिक मैथिलि व्याकरण के रचना । दोसर, मैथिलि भाषा में स्कूली शिक्षा - मुदा एकर बेसी आलोचना ही करब हम । जेत सौंसे समाज में अन्ग्रेज़ी के बोल-बाला अइछ आ सब माँ-बाप अपन धीया-पुता के अन्ग्रेज़ी पढाव ल परेसान छैथ ओत्त मैथिलि में पढ़ाई के विचार भी कोनो दिसे विकासशील नई मानल जैत।
अपन भाषा में पढ़ के उपलब्धी अहुना कनी असंभवे अई मैथिलि भाषा-भाषी लेल। भाषा के भी अपन स्टेटस होई छई आ समाज में प्रतिष्ठा लेल अक्सर बेसी लोकप्रिय और गतिशील भाषा के सीख में अपन भाषा के बिसरनाई बड स्वाभाविक छई ।
मुदा एहन सम्मेलनों सब में बहुत नीक काज या विचार नई होइअ । सब गोटा के अपन गप तथ्य आ दोसर के तथ्य गप बुझाई छई । एहन माहौल में विकास के भार उठावबला कमे लोग छैथ ।
Wednesday, May 27, 2009
Friday, April 3, 2009
सुन के महत्ता
कखनो कखनो कह परई छई कनी हमरो सुनु । बाज के दुनिया भइर के आदत अइछ, सुनबला कमे हैता । सबगोटा के अप्पन राम कहानी , अपन हर्स अपन विसादो मुदा दोसरो के संगे किच्छो भ रहल अइछ एकर कमे चिनता कैल जाई अई ।
तइयो अइस पैग दुखक गैप छई चिंता नई रहैतो चिंता के ढोंग कैनाइ। एकर किछ ख़ास कारन नई होईअ । सामाजिक चेहरा बचाव के प्रयास, नई ता होईअ रिसता बचाव के कोसिस। मुदा दुनु दिसे कनिके सही लेकिन एक टा मित्रक संवेदनाक के कमी खलईअ , चाहे ओ कोनो सम्बन्ध होए परस्पर भवनक बुझने -सूझने बिना सौहाद्रपूर्ण ओकरा निभैनाई कठिने नई असंभव जका बुझाई छई।
जे अगर सुनबो केलऊँ गप त अपने राग में एकटा सुझाव टैंक देनाई नई त रोब गाइँठ क समस्या से बिसरिए जाय के अपेक्षा केनाई त हमर सबक बेसीतर पारिवारिक मनमुटाव के जड़ अइछ ।
से बुझि लिअ, जे अपन सुनाब चाहई छि त दोसरो के सुन के अभ्यास कर पड़त। अंग्रेजी के फकरा जकां गप अई की "इफ यु नीड अ फ्रेंड ,यु नीड टु बिकम वन" ।
तइयो अइस पैग दुखक गैप छई चिंता नई रहैतो चिंता के ढोंग कैनाइ। एकर किछ ख़ास कारन नई होईअ । सामाजिक चेहरा बचाव के प्रयास, नई ता होईअ रिसता बचाव के कोसिस। मुदा दुनु दिसे कनिके सही लेकिन एक टा मित्रक संवेदनाक के कमी खलईअ , चाहे ओ कोनो सम्बन्ध होए परस्पर भवनक बुझने -सूझने बिना सौहाद्रपूर्ण ओकरा निभैनाई कठिने नई असंभव जका बुझाई छई।
जे अगर सुनबो केलऊँ गप त अपने राग में एकटा सुझाव टैंक देनाई नई त रोब गाइँठ क समस्या से बिसरिए जाय के अपेक्षा केनाई त हमर सबक बेसीतर पारिवारिक मनमुटाव के जड़ अइछ ।
से बुझि लिअ, जे अपन सुनाब चाहई छि त दोसरो के सुन के अभ्यास कर पड़त। अंग्रेजी के फकरा जकां गप अई की "इफ यु नीड अ फ्रेंड ,यु नीड टु बिकम वन" ।
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