Wednesday, May 27, 2009

एक टा मिथिला सम्मलेन!!!

आब किछ मास गेल अई सम्मलेन में गेला दू दिनक सम्मलेन रहे जईमे पहिल दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम दोसर दिन "मैथिलि भाषा के उद्भव विकास " पर चर्चा कैल गेल

हमर जिज्ञासा दोसर दिन के प्रोग्राम में बेसी रहेएक टा नेपालक भाषा वैज्ञानिक जिनकर किछ किताब पढने व् छलउँ हुनका दिया भी सुनने छलउँ । हुनकर चर्चा के विषय रहे "मैथिलि भाषाक मानकीकरण" । सब गोटा के सुन क इहे बुझैल की संविधान में मान्यता भेट के बादो अखन भाषाक विकास में बहुत किछ केनाई बाकी अइछ।

दू टा गप जे हमरा बीसेसकर सोच जोगर बुझैल - एक, की मानक मैथिलि के ढांचा तैयार केनाई जेना मधुबनी अथवा दरभंगा के मैथिलि के मानक माइन क आधुनिक मैथिलि व्याकरण के रचना । दोसर, मैथिलि भाषा में स्कूली शिक्षा - मुदा एकर बेसी आलोचना ही करब हम । जेत सौंसे समाज में अन्ग्रेज़ी के बोल-बाला अइछ आ सब माँ-बाप अपन धीया-पुता के अन्ग्रेज़ी पढाव ल परेसान छैथ ओत्त मैथिलि में पढ़ाई के विचार भी कोनो दिसे विकासशील नई मानल जैत।

अपन भाषा में पढ़ के उपलब्धी अहुना कनी असंभवे अई मैथिलि भाषा-भाषी लेल। भाषा के भी अपन स्टेटस होई छई आ समाज में प्रतिष्ठा लेल अक्सर बेसी लोकप्रिय और गतिशील भाषा के सीख में अपन भाषा के बिसरनाई बड स्वाभाविक छई ।

मुदा एहन सम्मेलनों सब में बहुत नीक काज या विचार नई होइअ । सब गोटा के अपन गप तथ्य आ दोसर के तथ्य गप बुझाई छई । एहन माहौल में विकास के भार उठावबला कमे लोग छैथ ।

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